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परिवार एवं समुदाय विज्ञान विषय पर 32वें द्विवार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ


महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर की संघटक इकाई गृह विज्ञान महाविद्यालय में तीन दिवसीय परिवार एवं समुदाय विज्ञानः स्थायी विकास लक्ष्यों हेतु एक उत्प्रेरक विषयक पर 32वें द्विवार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन उद्घाटन समारोह गुरुवार को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। सम्मेलन का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं भारतीय सामाजिक अनंसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित किया जा रहा है।

मुख्य अतिथि श्रीमती माहेश्वरी ने कहा कि एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण एवं विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार, निजी संस्थाओं, समाज एवं परिवार की अहम भूमिका होती है। हमें परिवारों की एकजुटता व सामंजस्य को बनाए रखने के नए तरीकों को पहचानने एवं अपनाने की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि देश के विकास के लिए संस्कार पूर्ण परिवार कि विकास की आवश्यकता है। सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ बदलते परिवेश मे विवाह पूर्व पारिवारिक जीवन को सुदृढ़ बनाने के लिए परिवार परामर्श सेवा का सुझाव भी दिया। अनुशासन परिवार और सामुदायिक विज्ञान के पांच बुनियादी घटक खाद्य विज्ञान और पोषण, विस्तार शिक्षा और संचार प्रबंधन, संसाधन प्रबंधन और उपभोक्ता विज्ञान, मानव विकास और पारिवारिक अध्ययन एवं वस्त्र और परिधान  डिजाइनिंग हैं। इन पांच घटकों का ज्ञान और कौशल परिवार के विकास और टिकाऊ समुदाय का निर्माण के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं।

समारोह की विशिष्ट अतिथि महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती अनिता भदेल ने कहा कि गृह विज्ञान एक ऐसा व्यापक क्षेत्र है जिसमें पोषण, व्यवहार, जीवन स्तर को उच्च करना, लिंग भेद एवं अन्य सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में गृह विज्ञान का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है। श्रीमती भदेल ने कहा इस सम्मेलन से प्राप्त परिणामों को घरेलू स्तर तक पहुंचाया जाना चाहिए जिससे परिवार और समाज को इस तरह के सम्मेलनों का फायदा मिल सके।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे महाराणा  प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर उमा शंकर शर्मा कहा कि हमारे देश में आजीविका सुधार के लिए निरन्तर कृषि विकास की अत्यन्त आवश्यकता है और इस दिशा में कृषि विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका होती है। प्रो. शर्मा ने कहा कि राष्टीªय गृह विज्ञान संघ मुख्य उद्देश्य वातावरण को सुरक्षित रखते हुए आजीविका के विभिन्न आयामों के बारें में जानकारी उपलब्ध कराकर परिवार के जीवन स्तर में सुधार करना है।

उद्घाटन समारोह में मुख्यवक्ता केन्द्रीय कृषक महिला संस्थान, भुवनेश्वर की निवर्तमान निदेशक प्रो. जतिन्दर किश्तवाडि़या ने टिकाउ विकास मे सामुदायिक विज्ञान की भूमिका विषय पर व्याख्यान दिया एवं  विकास के उद्ेश्यों को प्राप्त करने के सुझाव भी दिये। इस अवसर पर प्रो. अंजली कारोलिया, अध्यक्ष, गृह विज्ञान एसोसिएशन ने अपने व्याख्यान मे बताया कि भारतीय गृह विज्ञान संघ के उद्देश्यों एवं संघ की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।

अतिथियों ने उद्घाटन समारोह में संम्मेलन के शोध-पत्रों की संकलित स्मारिका, स्नातकोत्तर गृह विज्ञान महाविद्यालय के शोध-सार नामक पुस्तिका एवं सी.डी. का विमोचन भी किया । सम्मेलन संयोजक एवं अधिष्ठाता, गृह विज्ञान महाविद्यालय डॉ. शशि जैन ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

आयोजन सचिव एवं छात्र कल्याण अधिकारी, एमपीयूएटी डॉ. सुमन सिंह ने बताया कि बताया कि इस वार्षिक सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों के कोयम्बटूर, बड़ौदा, धारवाड़, बीकानेर, लुधियाना, नई दिल्ली, कोलकत्ता, मुम्बई, बैंगलोर, भोपाल, बिहार, वल्लभ विद्यानगर, कोटा के लगभग 500 से अधिक गृह विज्ञान वैज्ञानिक एवं छात्राएं भाग ले रहीे हैं।

प्रथम दिन डॉ. मृणालिनी देवी पंवार स्मृति व्याख्यान मे डॉ. प्रेमवती विजयन, निवर्तमान कुलपति, अविनाश लिंगम विश्वविद्यालय, कोयम्बटूर ने व्याख्यान दिया। सम्मेलन के दूसरे दिन गृह विज्ञान के पांचोें क्षेत्रों में यथा मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन, आहार एवं पोषण, वस्त्र एव परिधान अभिकल्पन, परिवार संसाधन प्रबन्धन, गृह विज्ञान प्रसार एवं संचार प्रबन्धन पर पांच समानान्तर तकनीकी सत्रों का आयोजन गृह विज्ञान महाविद्यालय में किया जाएगा। हर क्षेत्र के दो-दो सत्र आयोजित किए जाएंगे तथा एक सत्र में लगभग 45-50 मौखिक शोध-पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुत किए जाएंगे। आयोजित किए जाने वाले 10 सत्रों में विभिन्न विषय विशेष पर शोध पत्रों का वाचन किया जाएगा। सम्मेलन के संध्या कालीन सत्र के पश्चात राजस्थनी लोक गीतों पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी हुआ।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. गायत्री तिवारी ने किया तथा धन्यवाद की रस्म आयोजन सचिव डॉ. सुमन सिंह ने अदा की।

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