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बाघदडा नेचर पार्क मृगवन बनने को आतुर



शहर से मात्र 20 किलोमीटर दूर बाघदडा नेचर पार्क शीघ्र ही मृगवन का रूप लेने जा रहा है। शुक्रवार को गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया बाघदडा नेचर पार्क में चीतलों को प्राकृतिक आवास में रिलीज कर इसे मृगवन के रूप में विकसित करने का श्रीगणेश करेंगे।

मुख्य वन संरक्षक राहुल भटनागर ने बताया कि केन्द्रीय चिडि़याघर प्राधिकरण की ओर से चीतलों को बाघदडा नेचर पार्क में रिलीज करने हेतु निर्देश प्रदान किये गये है। पूर्व में यहां चिंकारा, चोसिंगा व सांभर आदि शाकाहारी वन्यजीव पाये जाते थे। इसके प्राकृतिक पूर्व वैभव को लौटाने हेतु इसमें चीतल हिरण छोड़कर नई दिशा दी जा रही है। शहर के पास स्थित होने से इस नये विकसित मृगवन में पर्यटक आसानी से पहुंच सकते है।

बाघदडा नेचर पार्क का स्वरूप

श्री भटनागर ने बताया कि यह स्थल कभी ‘‘क्लोज्ड एरिया’’ होता था, लेकिन बाद में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 में हुये संशोधन से वर्ष 2002 से यह क्षेेत्र ‘‘क्लोज्ड एरिया’’ नहीं रहा। लेेकिन इसकी जैविक महत्ता के मध्येनजर वन विभाग ने इसे नेचर पार्क के रूप में विकसित किया है।

मगरमच्छों के लिए उपयुक्त स्थल

इस पार्क में कभी न सूखने वाला एक बड़ा जलाशय है जिसमें अच्छी तादाद में मगरमच्छों का निवास है। मगरमच्छ देखने हेतु शहर के पास इससे कोई अच्छा स्थल अन्यत्र नहीं है। यहां तेंदुआ, सियार, लोमड़ी, नीलगाय, लंगूर, जंगली बिल्ली, खरगोश, अजगर, तरह-तरह के जलीय व थलीय पक्षी आसानी से देखे जा सकते है। मगरमच्छ अवलोकन हेतु यहां वॉच टॉवर निर्मित किया गया है जिसकी छत से जलाशय का विहंगम दृश्य व मगरमच्छों का विचरण आसानी से निहारा जा सकता है।

सदाबहार वृक्षों के साथ कई तरह की फर्न

जलाशय के नीचे की तरफ नाल में जामून, खजूर, बरगद, गूलर आदि सदाबहार वृक्षों की बहुतायत है। यहां कई तरह की फर्न देखने को मिलती है। इस नाल के खड़े तटो पर दुर्लभ कड़ाया वृक्षों के झुरमुट देखने योग्य है। इस पार्क में गुग्गल जैसी रेड डाटा वृक्ष प्रजातियां देखने को मिलती है।

पर्यटकों के लिए विभिन्न सुविधाएं

यहां मनोरंजन हेतु ट्री वॉक, ट्री क्लाइम्ब, जिप लाईन आदि का निर्माण किया गया है जहां प्रशिक्षित गाईडों के देख-रेख में साहसिक गतिविधियां की जा सकती है। यहां जलाशय की परिधि पर वास्तु शिल्प से समृद्ध पांच झोपडि़या विशेष आकार में बनाई गई है जहां लोग अपने परिवार के साथ भ्रमण व वन भोज का आनन्द ले सकते है। पार्क में पार्किंग की अच्छी व्यवस्था है तथा पहुॅच के लिये मोटरेबल ग्रेवल पथ स्थित है।

इस पार्क में सघन वन से लेकर कंटीले वन एवं घास के मैदान के ईको-सिस्टम उपलब्ध है। यहां कड़ाया, अरीठा, गुग्गल, जंगली जीनिया, सांभरबेल (सार्कोस्टीया एसीडम) जैसे दुर्लभ पौधे भी मिलते है।

ईको-ट्यूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

झामेश्वर महादेव जाने वाले दर्शनार्थी भी यहां पार्क का आनन्द ले सकेंगे। इस पार्क में हिरणों को छोड़ने से मृगवन के रूप में यहां एक नये पर्यटक स्थल का उदय होगा जिसमें ईको-ट्यूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। इसमें स्थानीय जनता के लोगो हेतु रोजगार के नये अवसर भी सृजित होंगे। यह स्थल शैक्षिक महत्व का भी है। विद्यालय-महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं यहां प्रकृति के विभिन्न पहलुओं की जानकारी ले सकेंगे। इस पार्क के प्रबन्ध में स्थानीय ईको-डवलपमेन्ट कमेटी का सहयोग लिया जाएगा।

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