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राजस्थान में आस्था की धरोहर को सहेजने के सार्थक प्रयास


धर्म-कर्म एवं आस्था की धरा राजस्थान में प्राचीन देवालयों का अपना इतिहास है, अपना वैभव है, जहां देश ही नहीं वरन विदेश से भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु परम श्रद्धा एवं भक्तिभाव से शीश नवाने पहुंचते हैं। इन देवालयों में अवस्थित प्राचीन विग्रहों (मूर्तियों) के साथ ही गुम्बद, नक्काशी द्वार, मेहराब, स्तंभ व दीवारों पर बड़े-बड़े प्रस्तर खंडों पर उन्नत कारीगरी में प्राचीन मूर्ति शिल्प में अनूठा आकर्षण देखने को मिलता है।

भारतवर्ष मंें विविध शासकों के काल में बने इन देवालयों की मनमोहक कलात्मकता के साथ ही यहां के विग्रहों की प्रासंगिकता भक्तों श्रद्धालुओं के विश्वास को अटूट बनाती है। आस्था से मन्नतें मांगने के बाद कार्य पूर्ण होने पर श्रद्धालु ठाकुर के द्वार आभार स्वरूप शीश नवाने राज्य के विविध धामों पर प्रतिवर्ष पहुंचते हैं।

ग्यारह प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास का मार्ग प्रशस्त

राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के कुशल नेतृत्व में बीते चार वर्षों के कार्यकाल में राज्य में ग्यारह प्रमुख बड़े धर्मस्थलों खाटूश्याम जी, डिग्गी कल्याण जी, मालपुरा (टोंक), मातृकुण्डिया (चित्तौड़गढ़), मेहन्दीपुर बालाजी (दौसा) बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर), पुष्करराज एवं बूढ़ा पुष्कर (अजमेर), श्री रूप नारायण (सेवंत्री), चारभुजाजी (राजसमंद), चौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर), सालासर एवं रामदेवरा आदि स्थलों पर सुनियोजित विकास एवं यात्री सुविधाएं विकसित करने को लेकर मास्टर प्लान तैयार करवाया गया है।

इनमें प्रथम चरण में खाटूश्याम जी, डिग्गी मालपुरा, मेहन्दीपुर बालाजी, बेणेश्वर धाम, पुष्करराज एवं बूढ़ा पुष्कर के लिए 24.90 करोड़ की स्वीकृति जारी होने से इन धर्मस्थलों के चरणबद्ध विकास का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

जीर्णोद्धार से मंदिरों का कायाकल्प

राज्य के देवालयों के जीर्णोद्धार के लिए सरकार ने संवेदनशील होकर वृहद कार्ययोजनाएं तैयार की है जिससे ये धार्मिक पर्यटन स्थल श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाए जा सकंेगे।

देवस्थान विभाग की ओर से झालावाड़ सूर्य मंदिर व बूंदी के केशवरायपाटन (श्री केशवरायजी) मंदिर के लिए डेढ़ करोड़ की स्वीकृति देकर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के माध्यम से विकास कार्य को प्रगति प्रदान की गई है। वहीं जैसलमेर के तनोट राय मंदिर पर एक करोड़ तीन लाख व्यय कर विकास कार्य पूरा कराया जाकर मंदिर सीमा सुरक्षा बल के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।

जनजाति बाहुल्य बांसवाड़ा जिले के गोटिया आम्बा तीर्थस्थल के लिए 2 करोड़ 68 लाख की स्वीकृति से विकास कार्य प्रगति पर है वहीं राजकीय आत्मनिर्भर श्रेणी के श्री चारभुजा जी (गढ़बोर) के लिए 5.45 करोड़ एवं रूपनारायण जी (सेवंत्री) के लिए 5.20 करोड़ की स्वीकृति के साथ ही कार्यादेश दिये जा चुके हैं।

गोगाजी (गोगामेड़ी)

राजस्थान के सुप्रसिद्ध जन आस्था के प्रमुख स्थल गोगाजी (गोगामेड़ी) के सर्वांगीण विकास के लिए वृहद कार्ययोजना तैयार की गई जिसमें प्रथम चरण में 18.95 करोड़ की स्वीकृति दी जाकर कार्य आरंभ कर दिया गया है। इसी प्रकार राज्य के प्रत्यक्ष प्रभार मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं अन्य विकास कार्याें के लिए 5 करोड़ की स्वीकृति दी गई जिसमें अधिकांश कार्य प्रगति पर हैं। इसी प्रकार भरतपुर के गंगामंदिर के लिए 10.10 करोड़ श्री लक्ष्मण मंदिर के लिए 1.21 करोड़ तथा बिहारीजी मंदिर के विकास के लिए 1.82 करोड़ की स्वीकृति भी जारी की गई है। राज्य के 96 मंदिरों में 2080 करोड़ के विकास कार्य कराए जा चुके हैं।

सरकार की इसी पुनीत मंशा के अनुरूप देवालयों, तीर्थस्थलों के समग्र विकास की योजनान्तर्गत 438 करोड़ के प्रस्ताव केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय को भिजवाए गए हैं। निश्चय ही राजस्थान सरकार की उदार मंशा से राजस्थान के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और यहॉं की पुरातन धर्म-संस्कृति के वैभव की सुगंध विस्तारित होकर श्रद्धालुओं तक पहुंचेगी।

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