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“पत्रकारिता की मजबूती के लिए पत्रकारों का साहसी होना जरूरी”


उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में गुरुवार को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के उपलक्ष में “बदलते दौर में मीडिया की बदलती भूमिका” विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि जब पत्रकारों का साहस मजबूत होगा तो पत्रकारिता भी मजबूत होगी। पत्रकारिता को मजबूत बनाने के लिए आज पत्रकारों का साहसी होना बहुत जरूरी है। वक्ताओं ने सूचनाओं के आक्रमण के इस दौर में समाचारों को पहचानने और पाठकों तक पहुंचाने को सबसे बड़ी चुनौती बताया।
प्रेस दिवस के उपलक्ष में आयोजित संगोष्ठी में दैनिक भास्कर के स्थानीय संपादक त्रिभुवन ने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती साहस की है। पत्रकारों का साहस मजबूती के साथ खबर को प्रस्तुत नहीं कर पा रहा है और इसी कारण हम सूचनाओं और समाचारों में भेद भी नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में मीडिया को गाली देने वाले जब सूचनाओं का प्रसार करते हैं तो वह नग्नता की सारी सीमाएं लांघ जाते हैं। लोकतंत्र के चार स्तंभ कभी-कभी पिलर्स की बजाए किलर्स बन जाते हैं। त्रिभुवन ने कहा कि समय पर सूचना नहीं पहुंचाना भी एक बड़ा अपराध है। हाल ही में सरकार द्वारा रखा गया एक विधेयक तब चर्चा में आया जब विधानसभा में रख दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह बना था तब मीडिया क्यों नहीं जागा। विधानसभा में पेश हुआ, तब जाकर अखबारों में हो हल्ला हुआ। उन्होंने कहा कि आज इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में सूचनाओं का आक्रमण हो रहा है और इनमे से समाचारों को छांटना और सही तरीके से प्रस्तुत करना बड़ी चुनौती का काम हो गया है। फेक न्यूज़ और वायरल वीडियोज़ की पड़ताल बहुत मुश्किल काम है। गलत और सही का संतुलित आकलन कर समाचार को पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा आज तटस्थता से रिपोर्टिंग नहीं हो रही है इसी कारण खबरों की गुणवत्ता में भी कमी आई है। उन्होंने कहा कि कैसा भी दौर हो पत्रकारिता को अपना धर्म नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि पत्रकारिता विवेक को जगाने का कार्य करती है। लगातार आ रहे बदलाव सकारात्मकता के साथ नकारात्मक चीजों को भी साथ ला रहे हैं। इन को चुनने में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होगी क्योंकि सोशल मीडिया कहीं ना कहीं भ्रमित करने का काम भी कर रहा है।
संगोष्ठी में राजस्थान पत्रिका के स्थानीय संपादक आशीष जोशी ने कहा कि अब पत्रकारिता में खबरों की मिसिंग का दौर लगभग खत्म हो गया है क्योंकि दिन भर के घटनाक्रम पाठक तक सोशल मीडिया के जरिए ही पहुंच जाते हैं लेकिन सोशल मीडिया की सूचनाओं को समाचारों में बदलना एक पेचीदा और चुनौती का कार्य है और इसमें सभी पत्रकारों को अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता है। जोशी ने कहा कि हम अखबार को इन सूचनाओं के जाल से निकालकर पाठक तक और अधिक विश्लेषणात्मक सामग्री प्रस्तुत करें तो पाठक की मानसिक जिज्ञासाओं का भी शमन हो पाएगा। साथ ही जागरूकता बढ़ाने वाली खबरों का भी प्रकाशन किया जाना चाहिए। जोशी ने कहा कि पहले की तुलना में अब खबरों में नकारात्मकता का दौर समाप्त हुआ है और नए अभियान और सकारात्मक खबरों का प्रचलन बढ़ने लगा है। यह एक शुभ संकेत है जो आने वाली पीढ़ी के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय की अधिष्ठाता प्रो. साधना कोठारी ने प्रेस दिवस के उपलक्ष में विभाग के भावी पत्रकारों को बधाई दी और कहा कि वह अपनी पूरी उर्जा के साथ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें और पत्रकारिता के जरिए समाज के कल्याण के लिए अच्छी स्टोरीज की संकल्पना करें। पत्रकारिता विभाग के प्रभारी डॉ. कुंजन आचार्य ने प्रेस दिवस की संकल्पना को बताते हुए इसके इतिहास की जानकारी दी साथ ही विभाग की ओर से इस तरह के होने वाले नियमित कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार राकेश शर्मा राजदीप के साथ ही मनीष कोठारी, अमन सिंह सेंगर, पूजा दवे, नितेश सिंह, उषा राजपूत, मनोज सोनी, कीर्ति भाटी, जयेश पंड्या ने बदलते लोकतंत्र और बदलते मीडिया विषय के विभिन्न पहलुओं पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन हिमाद्री शर्मा ने किया। धन्यवाद की रस्म भारत भूषण ने अदा की

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